Why Choose Us


आज देश का वातावरण बड़ा क्षुब्ध और अशाँत है। द्वितीय महायुद्ध के दिनों में भय और आशंका का वातावरण रहता था। पर चूँकि युद्ध क्षेत्र दूर था और इसलिए बहुत अधिक व्याकुलता नहीं थी और सामूहिक आक्रमण होने पर उससे बचने के सामूहिक उपायों का ढाढ़स था आज उससे भिन्न अवस्था है। आक्रमण की प्रतिक्रिया भी होती है, कुचल जाने पर चींटी भी काटने को तैयार हो जाती है।

जनता की जान माल को गुंडागिरी के आक्रमण से बचावे यह सरकार का कर्त्तव्य है। पर साथ ही हमें स्वयं भी सतर्क, सावधान रहना चाहिए और आत्मरक्षा के लिए सभी शाँतिमय साधनों से अपने आपको प्रस्तुत रखना चाहिए। थोड़े से संगठित बदमाश, असंगठित विपुल जन समूह को आतंकित कर देते हैं। अक्सर दस पाँच गुण्डे उपद्रव आरंभ करते हैं, उस उपद्रव को देखकर सब लोग भाग खड़े होते हैं, बाजार बंद हो जाते हैं और लोग अपने अपने घरों में भागकर छुप जाते हैं। इस भगदड़ का वे मुट्ठी भर बदमाश लाभ उठाते हैं और लूटमार, अग्निकाण्ड, हत्या आदि के मनमाने उपद्रव निधड़क होकर करते हैं। उन्हें इस प्रकार का खुला अवसर देने का बहुत कुछ दोष इन भगदड़ करने वालों पर भी है। इस भगदड़ का कारण आपस में एक दूसरे के सहयोग पर अविश्वास होना है। एक निर्दोष व्यक्ति सताया जा रहा हो तो उसकी सहायता करने की बजाय चुप रहने या भागने का विचार बहुत ही अनैतिक है। निर्दोष की सहायता करना और आक्रमणकारी को रोकना यह हर एक विचारवान व्यक्ति का कर्त्तव्य है, बिना इस कर्त्तव्य का पालन किये संगठित गुंडागिरी को नहीं रोका जा सकता। इसलिए हर जगह इस प्रकार के संगठन किये जाने चाहिए कि दूसरों की परवाह न करके केवल मात्र अपनी सुरक्षा की तरकीब सोचने की अपेक्षा सामूहिक सुरक्षा के लिए तत्पर रहेंगे। अपनी-अपनी बात सोचने से कोई किसी की मदद को नहीं आता और सब पिटते हैं। सबके साथ-साथ खुद भी बच जाते हैं। अकेलेपन में जितनी हानि की आशंका है, सामूहिकता में वह बहुत कम हो जाती है।

 

 

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